Wednesday, 10 September 2014

जिन्दगी तू खुद से मिल ले जरा
जिन्दगी तू थोङा सा हस ले जरा
खो गई तू इस मतलवी संसार मे
ढूढ रही है अमन चैन सांसारिक पदार्थ मे
जिन्दगी तू सुख की सांस लेले जरा
जिन्दगी तू थोङा सा हस ले जरा
सारी उम्र बीत जाएगी धन को कमाने मे
सारी उम्र लगा रहेगा रिश्तो को निभाने मे
जिन्दगी तू अपने अक्श से मिल ले जरा
जिन्दगी तू थोङा सा हस ले जरा

कल्पना सिहॅ

Saturday, 6 September 2014

प्रभु! कब मिटपायेगा मेरे जीवन का अंधियारा
 कब होगा मेरे जीवन पर अधिकार तुम्हारा

 घर मे चिङ-चिङ बाहर चिङ- चिङ ऐसा आज का जीवन है
जो देखो वही झल्लाया परेशान और उदास है
प्रभु! इस जगत का तू ही पालन हारा है
कब होगा मेरे जीवन पर अधिकार तुम्हारा है

 जीवन की कश्ती को भव सागर से निकालना चाहती हू अपनी आत्मा को परमात्मा मे विलीन करना चाहती हूॅ प्रभु !मेरे जीवन का अब तू ही एक सहारा है
कब होगा मेरे जीवन पर अधिकार तुम्हारा है

 कल्पना Kalpanamadhurmani.blogspot.in