निर्भया के लिए समर्पित
नारी थी वो नारी थी
सुन्दर थी वो बड़ी प्यारी थी
माँ,बेटी वो बहना थी
शर्म तो उसका गहना थी
वो सुने आगाँ की छवि न्यारी थी
नारी थी वो नारी थी
कितना उसको लाचार किया
उसकी अस्मत पर प्रहार किया
वो अँधेरे जीवन की उजियारी थी
नारी थी वो नारी थी
घर उसका बर्बाद किया
आत्मा को उसकी तार- तार किया
वो घर की छटा निराली थी
नारी थी वो नारी थी
सुन्दर थी वो बड़ी प्यारी थी
कल्पना सिंह