Thursday, 3 July 2014

कभी हमारे नाम  भी  खत आया करते थे 

कभी हमारे नाम  भी  खत आया करते थे
जिन्हे देखकर हम भी मुस्कराया करते थे
खोलते खोलते जिनको हमारा चेहरा खिल जाया करता था
पड़कर उसको प्यार ही प्यार बिखर जाया करता था
अब हमें खत कोई क्यों लिखता नहीं
क्या दो शब्द लिखने के लिए हमारे पास समय नहीं
आखिर क्यों खतों  से सब लोग रूठ गए
इतने प्यार भरे खतों के सिलसिले अचानक टूट गए

                                               कल्पना सिंह 

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