दर्द
अपना दर्द हम यहाँ किसको दिखाएँ
अपने ग़मों की कहानी यहाँ किसको सुनाये
यहाँ तो हर जगह छल, कपट और धोखा है
सच्चाई के साथ हमारे दर्द को बांटे
ऐसा दोस्त कहाँ से लांए
हम तो प्यार ही प्यार चाहते है जिंदगी में
मगर जिंदगी से इस नफरत को हम कैसे मिटायें
जिंदगी काट रहे हैं इस आस के भरोसे
खुशियां ही खुशियां होंगी हमारे भी जीवन में
मगर इन खुशियों को सजों सके
इतनी फुरसत कहाँ से लाएं
कल्पना सिंह
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