Friday, 18 July 2014



कही ख़ुशी है तो कही ग़मों का है साया 

कही ख़ुशी है तो कही ग़मों का है साया
खुशियों में तो जीना चाहता है जीवन सारा
पर दुखों से पाना चाहता है छुटकारा
कही धुप है तो कही छाया
कही प्यार है तो कही नफरत का है साया
प्यार के बिना जीवन में होता नहीं गुजारा
नफरत को प्यार से जीतने का मजा है न्यारा
कही मातम है तो कही शहनाई का बाजा
कही जिंदगी है तो कही मौत का है साया
जिंदगी मिली है तो शान से कर जीने का इरादा
पता नहीं कब मौत आ जाए लेकर पैगाम हमारा

 कल्पना सिंह
kalpanamadhurmani.blogspot.in

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