मैंने तुमको कितना चाहा
मैंने तुमको कितना चाहा, कब तुम ये जान पाओगे
मेरे मन के भावो को, तुम कब पहचान पाओगे
मेरे हृदय पर अंकित है, तेरा प्यारा सा चेहरा
मेरी आँखों पर भी रहता है, तेरे ख्वावो का ही पहरा
खुद को कितना रोकना चाहो, पर नित्य मेरे सपनो में आओगे
मैंने तुमको कितना चाहा, कब तुम ये जान पाओगे
तेरे मीठे बोल प्यार के, मेरी साँसों में वसे रहेंगे
तेरे प्यार में मेरे प्रिय, ये जाने कितनी बार कविता कहेंगे
मेरी इस प्यारी कल्पना को, तुम कब साकार बनाओगे
मैंने तुमको कितना चाहा, कब तुम ये जान पाओगे
प्यारी -प्यारी ध्वनि तुम्हारी, मुझको नित्य सुनाई देगी
हर पल तेरी ही सूरत, इन आँखों में वसी रहेगी
मधुर मिलन के सुखद पलों को, तुम कब पहचान पाओगे
मैंने तुमको कितना चाहा, कब तुम ये जान पाओगे
कल्पना सिंह
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