गम और ख़ुशी
गम और ख़ुशी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं
गम आते ही ख़ुशी चली जाती है
ख़ुशी को ही बना मकसद जिंदगी का
ख़ुशी को हर समय रख कायम
फिर हिम्मत क्या है गम की
जो खुश दिल व्यक्ति के दिल को घेरे
कल्पना सिंह
No comments:
Post a Comment