मायूस जिंदगी
कभी -कभी दिल में ये ख़याल आता है ,
कि इस झूठी दुनिया में क्यूँ जिए जा रहे है।
झूठी शान और शौकत के लिए ,
हम क्या -क्या न किये जा रहे है।
समाज के बनाये रस्म और रिवाज को निभाने में,
खुद जख्मी हुए जा रहे है।
यहाँ तो हम अपनी सांसे भी ,
दुसरो की मर्जी से लिए जा रहे है।
इन मतलबी रिश्तों को प्यार का नाम देकर,
हम तो बस जिंदगी जिए जा रहे है।
कल्पना सिंह
कल्पना सिंह
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