प्रभु! कब मिटपायेगा मेरे जीवन का अंधियारा
कब होगा मेरे जीवन पर अधिकार तुम्हारा
घर मे चिङ-चिङ बाहर चिङ- चिङ ऐसा आज का जीवन है
जो देखो वही झल्लाया परेशान और उदास है
प्रभु! इस जगत का तू ही पालन हारा है
कब होगा मेरे जीवन पर अधिकार तुम्हारा है
जीवन की कश्ती को भव सागर से निकालना चाहती हू अपनी आत्मा को परमात्मा मे विलीन करना चाहती हूॅ प्रभु !मेरे जीवन का अब तू ही एक सहारा है
कब होगा मेरे जीवन पर अधिकार तुम्हारा है
कल्पना Kalpanamadhurmani.blogspot.in
कब होगा मेरे जीवन पर अधिकार तुम्हारा
घर मे चिङ-चिङ बाहर चिङ- चिङ ऐसा आज का जीवन है
जो देखो वही झल्लाया परेशान और उदास है
प्रभु! इस जगत का तू ही पालन हारा है
कब होगा मेरे जीवन पर अधिकार तुम्हारा है
जीवन की कश्ती को भव सागर से निकालना चाहती हू अपनी आत्मा को परमात्मा मे विलीन करना चाहती हूॅ प्रभु !मेरे जीवन का अब तू ही एक सहारा है
कब होगा मेरे जीवन पर अधिकार तुम्हारा है
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