Friday, 29 August 2014

जिंदगी को कुछ इस तरह जीना चाहती हूँ



जिंदगी को कुछ इस तरह जीना चाहती हूँ
मंद मस्त हवाओं  में
भीनी -भीनी खुशवू के जैसी
विखर जाना चाहती हूँ

जिंदगी को कुछ इस तरह जीना चाहती हूँ
नीले -नीले आकाश में
चह चहाते पक्षियों के जैसी
उड़ जाना चाहती हूँ

जिंदगी को कुछ इस तरह जीना चाहती हूँ
मीठे -मीठे स्वर में
मधुर संगीत के जैसी
वीणा के तारो से जुड़ जाना चाहती हूँ

जिंदगी को कुछ इस तरह जीना चाहती हूँ
 घनघोर बादलों में
काली - काली घटाओं के जैसी
बरस जाना चाहती हूँ

जिंदगी को कुछ इस तरह जीना चाहती हूँ
हरी भरी जमीं में
प्रकृति की नैसर्गिक  सुंदरता के जैसी
बिछ  जाना चाहती हूँ

कल्पना सिंह
kalpanamadhurmani.blogspot.in

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