मा के आॅचल से निकली
पापा की उंगली पकङ कर खङी हो गई
अब मै ये समझी कि मै बङी हो गई
ममता की छाव मे पली
मां के संस्कारों मे ढली
मै अपने आॅगन की कली हो गई
अब मै ये समझ कि मै बङी हो गई
चहचहाती चिङियो सी फुदकने लगी
यौवन के रंग मे रंगने लगी
मै भटकते भ्रमरो की कुमुदनी हो गई
अब मै ये समझी कि मै बङी हो गई
पापा की उंगली पकङ कर खङी हो गई
अब मै ये समझी कि मै बङी हो गई
ममता की छाव मे पली
मां के संस्कारों मे ढली
मै अपने आॅगन की कली हो गई
अब मै ये समझ कि मै बङी हो गई
चहचहाती चिङियो सी फुदकने लगी
यौवन के रंग मे रंगने लगी
मै भटकते भ्रमरो की कुमुदनी हो गई
अब मै ये समझी कि मै बङी हो गई
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