Wednesday, 13 August 2014

मा के आॅचल से निकली
पापा की उंगली पकङ कर खङी हो गई
अब मै ये समझी कि मै बङी हो गई
ममता की छाव मे पली
मां के संस्कारों मे ढली
मै अपने आॅगन की कली हो गई
अब मै ये समझ कि मै बङी हो गई
चहचहाती चिङियो सी फुदकने लगी
यौवन के रंग मे रंगने लगी
मै भटकते भ्रमरो की कुमुदनी हो गई
अब मै ये समझी कि मै बङी हो गई

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